सच्ची मोहब्बत भाग-1

सच्ची मोहब्बत भाग-1


सच्ची मोहब्बत भाग-1


रात के 2:00 बजे थे शशि दर्द से कराह रहा था। सिर और चेहरा खून में सना हुआ था और अंगुलियों से लहू टपक रहा था। कपड़े और बिस्तर आंसू और लहू से भीग चुके थे। वह लगातार 5 घंटों से रोया जा रहा था। उसे दिल की बीमारी भी थी तो अब धीरे-धीरे दिल में भी दर्द होने लग गया था। दर्द की दवाई उसकी बूढ़ी मां के कमरे में रखी थी। अब उसकी इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह इस हालत में दवाई लेने मां के कमरे में जा सके। 

रात के 2:30 हो चुके थे। दर्द असहनीय होता जा रहा था। शशि उठता है पानी से अपना सर, हाथ-मुंह धोकर दूसरे कपड़े पहनकर मां के पास जाता है। मां के कमरे का दरवाजा खटखटाता है। मां को बोलता है कि दिल में बहुत तेज दर्द हो रहा है। मां घबरा जाती है और सोचती है कि उसकी बुढ़ापे की लाठी अकेला शशि उसे कुछ हो गया तो उसकी तीन अनब्याही बहनों का क्या होगा। शशि के पिता 5 साल पहले ही एक दुर्घटना में चल बसे थे। मां के साथ खड़ी बहने भी अपने भाई की हालत देखकर रोने लग गयी थी।

रात के 3:00 बज चुके थे मां ने किसी की गाड़ी बुलाई और शशि को बिठाकर हॉस्पिटल के लिए रवाना किया गया। सर पर टोपा और हाथ में दस्ताने पहनने से शशि के जख्म तो छीप गए थे। लेकिन आंसू अब भी रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। शशि अब यह सोच रहा था कि काश उसने कशिश से मोहब्बत ही ना की होती तो अच्छा होता,,,,

हां कशिश वह उसे 2014 में एक शादी समारोह में मिली थी। उस वक्त दोनों की बाली उम्र थी। कशिश 9वीं में और शशि 11वीं में था। दोनों को आपस में साथ रहना बातें करना बड़ा अच्छा लगा। दो दिन बाद दोनों बिछड़ गए। दोनो में ना दोस्ती हुयी ना प्यार, बस एक अजीब सा अहसास पैदा हुआ था जिसका कोई नाम नही था। दोनों आपस में एक-दुसरे नाम के अलावा कुछ भी नहीं जानते थे।

सितंबर 2015 की बात है। शशि की फेसबुक पर एक फ्रेंड रिक्वेस्ट आती है। वह शक्ल देखते ही पहचान जाता है कि वह कशिश है। उनको बिछड़े हुये एक साल हो गया था लेकिन दोनो कुछ नही भूले थे। उनके लिये वो कल ही बात थी। अब उनकी बात फेसबुक से शुरू हो गई थी मतलब सामान्य दोस्ती हो गई थी। दोनों जब भी स्कूल से फ़्री होते तो फेसबुक से बात कर लेते। दोनों की दोस्ती दिनों दिन बहुत गहरी हो गई।

उसके कुछ समय पश्चात शशि के पिता का निधन हो गया। अब शशि जिम्मेदारियों में बंध चुका था। लेकिन अब भी उसकी लगातार कशिश से वार्तालाप होती थी। अब दोनों ने आपस में मोबाइल नंबर ले लिए थे। लेकिन कशिश का खुद का मोबाइल ना होने की वजह से वह कॉल पर बात नहीं कर पाती थी।

7 अक्टूबर 2016 की रात्रि के 10:00 बजे थे। शशि के पास कशिश का कॉल आता है और दोनों की बातें शुरू हो जाती है। कशिश बताती है कि आज उसकी मम्मी का पेट का ऑपरेशन हुआ है और रात्रि में वह अपनी मम्मी के साथ हॉस्पिटल में रुकी है। अब दोनो आपस में अपनी बातें किए जा रहे थे ऐसा लग रहा था जैसे दोनो पास ही हो और प्रेम के मधूवन में घुमे जा रहे हो।

कशिश कह रह थी हमने कभी सोचा भी नहीं था कि हम वापस कभी मिलेंगे या फिर कभी बात होगी पर देखो कैसे मिल गए और बात हो गयी। बातों ही बातों में कशिश यह भी बताती है कि कल उसका जन्मदिन है।,,,

बात करते-करते 2 घंटे हो चुके थे। उसका जन्मदिन था शशि ने जन्मदिन की मुबारकबाद दी तो कशिश बोलती है मेरे जन्मदिन पर एक गिफ्ट मांगू दोगे। शशि बोलता है क्या चाहिए बोलो तो, फिर कशिश ने कहा आपका साथ चाहिये वह भी उम्र भर के लिए। शायद एक साल में अच्छी दोस्ती भी हो चुकी थी और आपस में समझने भी लग गए थे। तो शशि ने उसे हा कर दिया और उससे वादा कर लिया कि अब पक्का हम हमेशा साथ रहेंगे। अब दोस्ती प्यार में बदल गई थी और जिन्दगी का नया सफर शुरू हो चुका था।

दिनोंदिन प्यार बढ़ता गया। अब वो कैसे भी करके दिन में एक बार 20, 30 मिनट तो जरूर बात कर लेते थे साथ ही अपनी पढ़ाई पर ध्यान देते थे। शशि अपने पिता की मृत्यू के बाद घर की आई जिम्मेदारियों के कारण 12वीं के बाद ही एक कंपनी में जॉब करने लग गया था। उनका प्यार बिना मिले इतना गहरा हो गया था कि वह बिना बोले एक दूसरे के दर्द को समझ जाते थे।

जून का महीना था ग्रीष्म अवकाश के दिन थे। कशिश शशि के पास के शहर अपने किसी रिश्तेदार के यहां आई हो हुई थी। वह शहर शशि से लगभग 90 किलोमीटर दूरी पर था। दोनों मिलने का विचार बनाते और मिलने के लिये एक दिन एक जगह तय कर लेते हैं। शशि तैयार होकर उससे मिलने के लिए निकलता है। रास्ते भर में वो सिर्फ उसको ही सोचता रहता है कि वह कैसे दिखती होगी। आज क्या पहना होगा। हम कैसे बात करेंगे अगैरा वगैरह। शशि कुछ वक्त पहले पहुंचता है और कशिश का इंतजार करता रहता है। 15:20 मिनट बाद एक लड़की नीली जीन्स, सफेद टॉप, मुंह पर काला दुपट्टा बांधकर सामने से आती दिखाई देती है। शशि उसे सिर्फ उसकी आंखों से ही पहचान जाता है। कशिश पास आती है चेहरे से दुपट्टा हटाती है और दोनों आपस में देखकर मुस्कुराते हैं। शशि ने आज उसे पूरे 3 साल बाद देखा था वह बिल्कुल बदल चुकी थी।

उसका बचपन जाकर पूरा यौवन आ चुका था। वह आसमान से उतरी परी जैसी लग रही हो। उसकी उड़ती जुल्फे हवा में खुशबु फैला रही थी। जिसे शशि अपनी में सांसो महसूस कर रहा था। हल्की काजल लगी उसकी आँखे, बिना लिपस्टिक लगे लाल सुर्ख होठ और मोती समान बिल्कुल सफेद उसके दांत और ऊपर से हल्की मुस्कान किसी का भी कतल करने के लिये पर्याप्त थे। शशि उसको देखकर ख्वाबो में खो चुका था। इतने में कशिश ने बोला अरे शशि क्या हो गया। शशि का खवाब टूटा और दोनो साथ मुस्कुराने लगे। शशि कहता है मेरी जिन्दगी में रोशनी सफर तुम्हारे आने से शुरू हुआ हैं और तुम्हारे जाने पर खत्म हो जायेगा।

आज शशि कशिश को साथ पाकर अत्यंत प्रसन्न था। दोनों आपस में बात करते हुये पास ही में स्थित एक पुराने महल को देखने जाते हैं। एक अद्भुत एहसास और सुकून के साथ हाथो को पकड़े हुये पूरे महल में घूमते है। 2 घंटे कब बीत जाते हैं पता ही नहीं चलता। कशिश को उसके रिश्तेदार के यहां से फोन आने लग जाते हैं। कशिश बोलती है शशि अब बहुत देर हो गई यार अब मुझे जाना होगा। शशि कशिश को प्यार से गले लगा लेता है उसका यह अनौखा स्पर्श.....


शेष कहानी कल अगले भाग में..........

-सनी लाखीवाल


 

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